Friday, 8 August 2014

२. त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ति


२.   त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ति


त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ति दत्त हा जाणा |

त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्यराणा |

नेति नेति शब्द न ये अनुमाना |

सुरवर मुनिजन योगी समाधिले ध्याना ॥ १ ॥


जयदेव जयदेव जय श्रीसद्गुरुदत्ता |

आरती ओवाळीतां हरसि भवचिंता ॥ धृ ॥



सबाह्यअभ्यंतरीं तूं एक दत्त |

अभाग्यासी कैसी न कळे ही मात |

पराही परतली कैचा हा हेत |

जन्ममरणाचा पुरला असे अंत ॥ २ ॥ जय देव...


दत्त येऊनीयां उभा ठाकला |

सद्भावें साष्टांगें प्रणिपात केला |

प्रसन्न होऊनिया आशीर्वाद दिधला |

जन्ममरणाचा फेरा चुकवीला ॥ ३ ॥ जय देव...


दत्त दत्त ऐसे लागलें ध्यान |

हरपलें मन झालें उन्मन |

मी तूं पणाची झाली ओसण |

एका जनार्दनी श्रीदत्त ध्यान ॥ ४ ॥ जय देव...

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